मृत्यु के बाद भी रिकॉर्ड में नाम रहने की परेशानी खत्म करने प्रशासन की विशेष पहल
कई बार किसी परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद भी सरकारी जमीन रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज रह जाता है, जिससे परिवारों को छोटे-बड़े सभी कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी गंभीर समस्या को दूर करने के लिए बस्तर जिले में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है।Bastar जिले में पिछले चार वर्षों से लंबित फौती नामांतरण मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य मृत व्यक्तियों के स्थान पर उनके सही वारिसों के नाम भूमि रिकॉर्ड में दर्ज करना था।
गांव-गांव जाकर तैयार हुई सूची, घर-घर हुआ सत्यापन
इस अभियान की शुरुआत गांव स्तर से की गई। ग्राम सचिवों ने पिछले चार वर्षों में मृत्यु को प्राप्त व्यक्तियों की सूची तैयार की। इसके बाद पटवारियों ने उन मामलों की पहचान की जहां जमीन रिकॉर्ड में बदलाव जरूरी था।कोटवारों ने गांवों में जानकारी का सत्यापन किया, जबकि तहसीलदारों ने पूरे अभियान की निगरानी की। इस प्रक्रिया के दौरान 611 गांवों से विस्तृत डेटा एकत्र किया गया।आंकड़ों के अनुसार पिछले चार वर्षों में कुल 17,405 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई, जिनमें से 8,651 मामलों में फौती नामांतरण की आवश्यकता पाई गई।
8,241 मामलों में पूरा हुआ नामांतरण, केवल 410 शेष
संयुक्त टीम ने घर-घर जाकर न केवल जानकारी सत्यापित की, बल्कि जिन परिवारों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं था, उनके लिए प्रमाण पत्र भी बनवाए गए। इसके साथ ही वारिसों की पहचान और वंशवृक्ष तैयार कर सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं।अभियान के परिणामस्वरूप अब तक 8,241 मामलों में फौती नामांतरण पूरा कर दिया गया है, जबकि केवल 410 मामले अभी लंबित हैं।यह अभियान Tokapal, Karpawand, Bastar, Bastar, Bastar, Bhanupratappur, Jagdalpur, Darbha सहित कई आदिवासी और सुदूर क्षेत्रों में चलाया गया।सबसे अधिक प्रगति बकावंड, करपावंड, नानगुर और बास्तानार जैसे क्षेत्रों में देखी गई, जबकि जगदलपुर और लोहंडीगुड़ा में लगभग सभी पात्र मामलों का निराकरण हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने बताया सुशासन का उदाहरण
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि बस्तर में चलाया गया यह अभियान सुशासन और संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण है।इस पहल से हजारों परिवारों के भूमि रिकॉर्ड अपडेट हो गए हैं, जिससे उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।







