अमृत सरोवरों पर योग और जनसहभागिता का उत्सव
दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में मनरेगा के अंतर्गत निर्मित अमृत सरोवरों पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साह, जनभागीदारी और जागरूकता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास, जनजागरूकता गतिविधियाँ एवं “अमृत सरोवर संवाद” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सामुदायिक सहभागिता को मजबूत बनाना रहा।
योग कार्यक्रमों में स्थानीय ग्रामीणों, स्कूली विद्यार्थियों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, युवा मंडलों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रतिभागियों ने सामूहिक योगाभ्यास कर नियमित योग के महत्व को समझा और शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम में प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाने और स्वस्थ समाज निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।
जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान
अमृत सरोवर स्थलों पर आयोजित गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों में जल संरक्षण संरचनाओं के प्रति अपनत्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में अमृत सरोवर उपयोगकर्ता समूहों, स्वयं सहायता समूहों, जनप्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही।
इस अवसर पर उपस्थित सभी नागरिकों ने जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा का सामूहिक संकल्प लिया। जिले में मनरेगा के तहत निर्मित 123 अमृत सरोवर अब जल संरक्षण के साथ-साथ सामुदायिक गतिविधियों और जनजागरूकता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
अमृत सरोवर संवाद में दी गई अधिनियम की जानकारी
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित “अमृत सरोवर संवाद” कार्यक्रम में ग्रामीणों एवं श्रमिकों को विकसित भारत-जी रामजी अधिनियम, 2025 के प्रमुख प्रावधानों एवं अधिकारों की जानकारी दी गई। बताया गया कि यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील होगा।
संवाद के दौरान श्रमिकों को 125 दिवस रोजगार की गारंटी, सामाजिक सुरक्षा, आजीविका संवर्धन एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही ग्रामीणों को उनके अधिकारों, उपलब्ध अवसरों और विभिन्न योजनाओं के लाभों के प्रति जागरूक किया गया।कार्यक्रम के माध्यम से श्रमिकों और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।









