भाटापारा में तिलहन मेला और जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन
छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur से जुड़े कार्यक्रम के तहत गुरुवार को भाटापारा में ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (NMEO-OS)’ के अंतर्गत जिला स्तरीय तिलहन मेला सह जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए।
किसानों को दिया पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती का संदेश
कार्यशाला में रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता Brijmohan Agrawal ने किसानों को संबोधित करते हुए पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को अपनाना न केवल धरती की उर्वरकता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
धान पर अत्यधिक निर्भरता को बताया खतरा
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि केवल धान की फसल पर अत्यधिक निर्भरता से मिट्टी की उर्वरक शक्ति लगातार घट रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खेती के तरीके में विविधता नहीं लाई गई तो भविष्य में कृषि उत्पादन और भूमि की गुणवत्ता दोनों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
किसानों को दी समावेशी खेती अपनाने की सलाह
सांसद ने किसानों को सलाह दी कि वे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का समावेश कर खेती करें, जिससे उत्पादन भी बढ़े और मिट्टी की सेहत भी बनी रहे। उन्होंने जैविक खेती को टिकाऊ कृषि का मजबूत आधार बताया।
इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भी तिलहन उत्पादन बढ़ाने और रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में जैविक उपायों को अपनाने पर विस्तार से जानकारी दी।










