बैकुंठपुर में 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला, आरोपी जीजा गिरफ्तार
रायपुर, 1 जुलाई 2026 – छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर में 12 साल की नाबालिग बच्ची को बंधक बनाकर दुष्कर्म करने के मामले में पुलिस ने आरोपी जीजा को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में नाबालिग की मुंहबोली बड़ी बहन (आरोपी की पत्नी) ने पति को बचाने के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।
बच्चों पर हुई शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना
दो अनाथ भाई-बहन — 12 वर्षीय बच्ची और उसका 9 वर्षीय भाई — अपनी मुंहबोली दीदी के घर रह रहे थे। आरोप है कि दीदी और जीजा ने दोनों बच्चों के साथ लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की। परेशान होकर दोनों बच्चे घर से भागकर एक परिचित के यहां पहुंच गए।
सूचना मिलने पर पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) ने बच्चों को संरक्षण में लिया। काउंसलिंग के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ — जीजा ने 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था और छोटे भाई को भी लगातार प्रताड़ित किया जाता था। CWC ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर दोनों बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर रखा।
हाईकोर्ट में सुनवाई, बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में रखने का आदेश
मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता महिला ने दावा किया कि उसकी सौतेली बहन और भाई को जबरन चाइल्ड हेल्पलाइन में रखा गया है।
कोर्ट ने मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया कि दोनों बच्चों को कोर्ट में पेश किया जाए। कोरिया की कलेक्टर रोक्तिमा यादव, अंबिकापुर के अपर कलेक्टर राम सिंह ठाकुर और महिला-बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को हाईकोर्ट में पेश किया।
कोर्ट के प्रमुख आदेश:
- नाबालिग बच्ची और उसके छोटे भाई को अगली सुनवाई तक चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में रखा जाए।
- काउंसलर की रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की जाए।
- मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी।
पुलिस ने पहले ही दर्ज किया था केस
पुलिस ने आरोपी जीजा के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें अलग-अलग बाल गृहों में रखा गया था — 9 साल के बच्चे को बैकुंठपुर के चाइल्ड वेलफेयर सेंटर और 12 साल की बच्ची को अंबिकापुर के बालिका गृह में शिफ्ट किया गया था।
यह मामला छत्तीसगढ़ में बाल सुरक्षा और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों की संवेदनशीलता को एक बार फिर रेखांकित करता है। हाईकोर्ट अब इस पूरे प्रकरण की निगरानी कर रहा है।
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