सहमति से बने संबंध और लिव-इन रिश्ते को रेप नहीं माना जा सकता, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Spread the love

ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पीड़िता की अपील खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे हों और वे साथ भी रहे हों, तो केवल बाद में शादी से इनकार कर देने के आधार पर रेप का मामला नहीं बनता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए पीड़िता की अपील को शुरुआती सुनवाई (एडमिशन स्टेज) में ही खारिज कर दिया।

आईआईएम रायपुर में पढ़ाई के दौरान हुई थी पहचान

मामले के अनुसार, 40 वर्षीय महिला ने वर्ष 2019 में Indian Institute of Management Raipur में एमबीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक सहपाठी युवक से हुई। पढ़ाई के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में उनके बीच प्रेम संबंध स्थापित हो गए।

लंबे समय तक साथ रहने और सहमति से संबंध के मिले प्रमाण

सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड और साक्ष्यों में यह सामने आया कि दोनों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे। वे एक-दूसरे के साथ रहे और रिश्ते को लेकर दोनों पक्षों की सहमति भी मौजूद थी। अदालत ने माना कि यह मामला जबरन बनाए गए शारीरिक संबंध का नहीं है।

केवल शादी से इनकार करने पर नहीं बनता रेप का मामला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी रिश्ते में दोनों वयस्कों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध बने हों और बाद में किसी कारणवश विवाह नहीं हो पाए, तो हर ऐसे मामले को रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि रेप का अपराध साबित करने के लिए यह दिखाना आवश्यक है कि शुरुआत से ही आरोपी की मंशा धोखा देने की थी और उसने झूठा विवाह का वादा कर संबंध बनाए थे।

पीड़िता की अपील को शुरुआती चरण में ही किया खारिज

मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे आरोपी के खिलाफ रेप का अपराध सिद्ध होता हो। इसके चलते पीड़िता की अपील को एडमिशन स्टेज पर ही खारिज कर दिया गया।

न्यायालय की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

हाईकोर्ट का यह फैसला सहमति से बने संबंधों, लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह के वादे से जुड़े मामलों में कानूनी दृष्टिकोण को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है। अदालत ने एक बार फिर दोहराया कि हर असफल प्रेम संबंध या विवाह न हो पाने की स्थिति को स्वतः आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता।

  • Related Posts

    THDC टनल हादसा: 22 लोगों में से 19 को सुरक्षित निकाला गया, 3 की तलाश जारी

    Spread the love

    Spread the love चमोली में रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन, जिलाधिकारी ने मौके पर संभाली कमान चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के मायापुर (पीपलकोटी) स्थित THDC की निर्माणाधीन टनल में मलबा…

    Read more

    झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज का आरोप, अभिजीत दिपके ने जताया विरोध

    Spread the love

    Spread the love अस्पताल में भर्ती छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल पर की बात, आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान छत्रपति संभाजीनगर। झारखंड में शांतिपूर्ण आंदोलन कर…

    Read more

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    खैरागढ़ में दर्दनाक हादसा, तालाब में डूबने से दो मासूमों की मौत

    खैरागढ़ में दर्दनाक हादसा, तालाब में डूबने से दो मासूमों की मौत

    ऑनलाइन ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर 45 लाख की ठगी, आरोपी बैतूल से गिरफ्तार

    ऑनलाइन ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर 45 लाख की ठगी, आरोपी बैतूल से गिरफ्तार

    21 साल पुराने चावल घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई, 40 हजार पन्नों का अभियोग-पत्र पेश

    21 साल पुराने चावल घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई, 40 हजार पन्नों का अभियोग-पत्र पेश

    DEO-BEO प्रभारी नियुक्ति विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वरिष्ठता को लेकर दिया अहम आदेश

    DEO-BEO प्रभारी नियुक्ति विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वरिष्ठता को लेकर दिया अहम आदेश

    CG BREAKING: EOW ने भागीरथी वर्मा के खिलाफ पेश किया 1500 पन्नों का चालान

    CG BREAKING: EOW ने भागीरथी वर्मा के खिलाफ पेश किया 1500 पन्नों का चालान

    तिरंगा हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा

    तिरंगा हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा