विभाजन पर भागवत का बड़ा बयान
नागपुर|राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में सिंधी समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 1947 के विभाजन के बाद भारत आए लोगों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों को “शरणार्थी” कहना उचित नहीं है, क्योंकि वे अपनी इच्छा से मातृभूमि और धर्म की रक्षा के लिए भारत आए थे।
“उन्होंने संपत्ति नहीं, देश चुना”
भागवत ने कहा कि विभाजन के समय लाखों लोगों ने अपनी जमीन, कारोबार और वर्षों की कमाई छोड़ दी, लेकिन भारत को चुना ताकि वे बिना किसी भय के अपने धर्म और संस्कृति के अनुसार जीवन जी सकें। उनके अनुसार इन लोगों ने धन-दौलत नहीं, बल्कि देश और अपनी आस्था को प्राथमिकता दी।
“वे शरणार्थी नहीं, संघर्ष के योद्धा थे”
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि ऐसे लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया और अपार कष्ट सहने के बावजूद अपने विश्वास से समझौता नहीं किया। इसलिए उन्हें शरणार्थी नहीं बल्कि “संघर्ष के योद्धा” कहा जाना चाहिए।
शिक्षा और संस्कार पर भी दिया संदेश
भागवत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए जो सही और गलत का अंतर समझें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने युवाओं से कठिन परिस्थितियों में हार न मानने और निरंतर संघर्ष करते रहने का आह्वान किया।
बयान से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
मोहन भागवत का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। विभाजन, विस्थापन और उस दौर के इतिहास को लेकर उनके इस बयान को अलग-अलग नजरियों से देखा जा रहा है।










