महासमुंद के तीर्थराज प्रधान को सबूतों के अभाव में मिली राहत
महासमुंद। जिले के सांकरा थाना क्षेत्र में नकली नोट रखने के आरोप में गिरफ्तार तीर्थराज प्रधान को विशेष एनआईए न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। विशेष एनआईए न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी को नोटों के नकली होने की जानकारी थी या वह उन्हें असली बताकर चलाना चाहता था।
वाहन जांच के दौरान हुई थी कार्रवाई
अभियोजन के अनुसार 1 फरवरी 2021 को एनएच-53 स्थित गुरु घासीदास चौक पर वाहन जांच के दौरान तीर्थराज प्रधान की मोटरसाइकिल से 100 और 500 रुपये के नोट बरामद किए गए थे। जांच के बाद कुछ नोट नकली पाए गए, जबकि एक-एक 100 और 500 रुपये का नोट असली भी निकला।
गवाहों ने नहीं किया पुलिस दावे का समर्थन
सुनवाई के दौरान जब्ती के स्वतंत्र गवाह ऋषिकेश खुंटे और खेमलाल पाणिग्रही ने पुलिस के दावों का समर्थन नहीं किया। अदालत ने इसे मामले की कमजोरी मानते हुए कहा कि स्वतंत्र साक्ष्य की कमी अभियोजन पक्ष के खिलाफ जाती है।
जब्ती प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
अदालत ने पाया कि जब्त नोटों की सीलिंग, रोजनामचा और अन्य आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड में प्रस्तुत नहीं किए गए। साथ ही पुलिस यह भी स्पष्ट नहीं कर सकी कि नकली नोट आरोपी तक कैसे पहुंचे और उनका स्रोत क्या था।
जांच अधिकारी पर भी सवाल
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में एक ही पुलिस अधिकारी शिकायतकर्ता भी था और जांच अधिकारी भी, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
अदालत का फैसला
सभी तथ्यों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद विशेष एनआईए अदालत ने आरोपी तीर्थराज प्रधान को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।











