EPF के नए नियम से बड़ा बदलाव
नई दिल्ली| केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए EPF Scheme 2026 के तहत अब कर्मचारियों के लिए पूरे बेसिक वेतन का 12% पीएफ में जमा करना अनिवार्य नहीं रहेगा। अब अनिवार्य योगदान केवल निर्धारित वेतन सीमा (₹15,000) तक ही होगा, यानी अधिकतम ₹1,800 प्रति माह। इससे अधिक राशि का योगदान पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) माना जाएगा।
क्या बदलेगा कर्मचारियों के लिए?
यदि किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन ₹15,000 से अधिक है, तो अब उसे ₹1,800 से अधिक पीएफ जमा करना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, कर्मचारी और कंपनी आपसी सहमति से पहले की तरह अधिक योगदान जारी रख सकते हैं। अतिरिक्त योगदान को अब स्वैच्छिक योगदान माना जाएगा।
इन-हैंड सैलरी पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन कर्मचारियों का पीएफ वास्तविक बेसिक वेतन पर कटता था, उनके लिए भविष्य में इन-हैंड सैलरी बढ़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि यह पूरी तरह कंपनी की सैलरी पॉलिसी और कर्मचारी की पसंद पर निर्भर करेगा। हर कर्मचारी की सैलरी में स्वतः बढ़ोतरी नहीं होगी।
निकासी के नियम भी हुए आसान
नई EPF योजना में एडवांस निकासी की श्रेणियों को 13 से घटाकर 3 कर दिया गया है, जिससे कर्मचारियों के लिए पीएफ निकालने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल होगी।
करोड़ों कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
सरकार द्वारा लागू किए गए इस नए नियम का असर देश के करीब 8 करोड़ EPFO सदस्यों पर पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य EPF प्रणाली को अधिक सरल, डिजिटल और लचीला बनाना है, जबकि कर्मचारी चाहें तो पहले की तरह अधिक पीएफ योगदान भी जारी रख सकते हैं।










