बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन का बड़ा फैसला, अनुपयोगी और असुरक्षित भवनों पर होगी कार्रवाई
दुर्ग। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिले के विभिन्न शासकीय विद्यालयों के जर्जर हो चुके भवनों और कक्षों को डिस्मेंटल (ध्वस्त) करने की अनुमति दे दी है।
यह निर्णय जिला शिक्षा अधिकारी और लोक निर्माण विभाग दुर्ग संभाग के निरीक्षण प्रतिवेदन एवं प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है। इन भवनों को अनुपयोगी और असुरक्षित घोषित करते हुए इन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
66 स्कूलों के जर्जर भवनों पर होगी कार्रवाई
प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, दुर्ग जिले के तीनों प्रमुख विकासखंडों दुर्ग, धमधा और पाटन के कुल 66 शासकीय स्कूलों के जर्जर कक्षों और भवनों को डिस्मेंटल किया जाएगा।
कलेक्टर द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि चिन्हित स्कूलों के अलावा जिले के अन्य जर्जर भवनों का भी लोक निर्माण विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में उन भवनों को भी ध्वस्त करने की अनुमति दी जाएगी।
दुर्ग विकासखंड के 8 स्कूलों के भवन शामिल
जारी सूची के अनुसार, दुर्ग विकासखंड के 8 शासकीय स्कूलों के जर्जर भवन और कक्षों को तोड़ा जाएगा।
इनमें शामिल हैं—
शासकीय प्राथमिक शाला तितुरडीह क्रमांक-01 के 3 कक्ष और 1 हॉल
शासकीय प्राथमिक शाला कातुलबोड़ के 5 कक्ष
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुपेला के 9 कक्ष
शासकीय प्राथमिक शाला सुपेला क्रमांक-01 के 10 कमरे
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला वृंदानगर का 1 कक्ष
शासकीय प्राथमिक शाला जुनवानी के 4 कक्ष
शासकीय प्राथमिक शाला सुभाषनगर के 4 कक्ष और 1 बरामदा
शासकीय प्राथमिक शाला कैंप-01 भिलाई का पूरा भवन
सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा प्रशासन
जिला प्रशासन का कहना है कि जर्जर भवनों में बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। बारिश और अन्य मौसम में ऐसे भवनों के गिरने की आशंका बनी रहती है। इसी को देखते हुए असुरक्षित भवनों को हटाने का निर्णय लिया गया है।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को जल्द से जल्द कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।












