च्वाइस सेंटर संचालकों को बनाया निशाना, साइबर ठगी की रकम मंगवाकर लेते थे नकद
दुर्ग। साइबर अपराध के एक नए तरीके का खुलासा करते हुए दुर्ग पुलिस ने म्यूल अकाउंट मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर मेडिकल इमरजेंसी का बहाना बनाकर च्वाइस सेंटर संचालकों को विश्वास में लेने और उनके बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाने का आरोप है।
मेडिकल इमरजेंसी बताकर मांगते थे मदद
पुलिस के मुताबिक आरोपी लोगों को मेडिकल इमरजेंसी की बात बताकर अपने झांसे में लेते थे। इसके बाद च्वाइस सेंटर संचालकों से उनके बैंक खातों में रकम मंगवाते और बदले में उन्हें नकद राशि देने की बात कहते थे। इस तरह बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था।
जांच में सामने आया म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल
पुलिस जांच में पता चला कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के तौर पर किया जा रहा था। ऐसे खातों के जरिए साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसकी वास्तविक पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है।
तकनीकी साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
जामुल पुलिस ने मामले की विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस मामले में साइबर ठगी की रकम और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।








