सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
नई दिल्ली| देशभर में इन दिनों “गुलाबी पेट्रोल” और पेट्रोल टैंक के पास चींटियां लगने वाले वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो के बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या पेट्रोल में मिलाया जा रहा एथेनॉल उनकी गाड़ी के इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है और सरकार आखिर इसे बढ़ावा क्यों दे रही है।
सरकार एथेनॉल मिलाने पर क्यों दे रही जोर?
सरकार का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और किसानों की आय बढ़ाना है। एथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, जिससे किसानों को भी सीधा लाभ मिलता है।
गुलाबी पेट्रोल और चींटियों की सच्चाई
वायरल वीडियो में दावा किया गया कि एथेनॉल युक्त पेट्रोल की वजह से पेट्रोल गुलाबी दिखता है और टैंक पर चींटियां आती हैं। हालांकि सरकार और तेल कंपनियों ने इन दावों को भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल में कोई शक्कर नहीं होती, इसलिए चींटियां आकर्षित होने का सवाल ही नहीं उठता।
क्या इंजन खराब होने का खतरा है?
सरकार के अनुसार E20 जैसे एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से इंजन, वारंटी या इंश्योरेंस क्लेम पर कोई नकारात्मक असर साबित नहीं हुआ है। हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज और इंजन प्रदर्शन को लेकर शिकायतें भी उठाई हैं, जिन पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
देश के लिए कितना जरूरी है यह फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से प्रदूषण कम करने, तेल आयात घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से सरकार भविष्य में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का दायरा और बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
फिलहाल क्या करें वाहन मालिक?
सरकार ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। अपने वाहन निर्माता की सलाह के अनुसार ही ईंधन का उपयोग करें और किसी भी भ्रम की स्थिति में केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।










