न्याय श्रुति, ई-साक्ष्य, ई-समन, ई-चालान, CCTNS और ICJS के प्रभावी उपयोग का दिया गया प्रशिक्षण
दुर्ग। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के निर्देशानुसार और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में दुर्ग जिला न्यायालय में ई-कोर्ट परियोजना के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य न्यायालयों में डिजिटल तकनीकों का प्रभावी क्रियान्वयन कर न्याय वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, त्वरित, सुगम और तकनीक-सक्षम बनाना था।

कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के चतुर्थ तल स्थित नवीन सभागार में किया गया। इसमें न्याय श्रुति (Nyay Shruti), ई-साक्ष्य (e-Sakshya), ई-समन (e-Summon), ई-चालान (e-Challan), CCTNS और ICJS जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल मॉड्यूल पर प्रशिक्षण दिया गया।

न्यायिक अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यशाला का संचालन और समन्वय दीपक कोशले, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, दुर्ग तथा रवि महोबिया, व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी), दुर्ग ने किया। कार्यक्रम में जिला न्यायपालिका के सभी न्यायिक अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

डिजिटल मॉड्यूल के व्यावहारिक उपयोग की दी जानकारी
कार्यशाला में ई-कोर्ट परियोजना के तहत विकसित नवीन डिजिटल मॉड्यूलों की कार्यप्रणाली और न्यायालयीन कार्यों में उनके प्रभावी उपयोग का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विभिन्न प्रणालियों का व्यवहारिक प्रदर्शन भी किया गया।
न्याय श्रुति के माध्यम से न्यायालयीन कार्यवाही के डिजिटल ट्रांसक्रिप्शन, ई-साक्ष्य के जरिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित और व्यवस्थित प्रबंधन तथा ई-समन के माध्यम से समन की त्वरित एवं पारदर्शी तामील की प्रक्रिया समझाई गई।
पुलिस, न्यायालय और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
कार्यशाला में ई-चालान प्रणाली के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई। वहीं CCTNS के माध्यम से पुलिस और न्यायालय के बीच सूचना समन्वय तथा ICJS के जरिए न्यायालय, पुलिस, जेल और अन्य जांच एजेंसियों के बीच डिजिटल सूचनाओं के निर्बाध आदान-प्रदान की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग से न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तेजी आएगी तथा विभिन्न विभागों के बीच सूचना का आदान-प्रदान अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगा।









