26 बाल देखभाल संस्थाओं में 156 सुरक्षा गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव, वित्तीय सहायता पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से जवाब तलब
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बाल देखभाल संस्थाओं और किशोर न्याय गृहों से किशोरों के भागने की लगातार सामने आ रही घटनाओं को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से वित्तीय सहायता को लेकर जवाब मांगा है।
केंद्र सरकार को बनाया गया पक्षकार
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को मामले में आवश्यक पक्षकार बनाया। कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा है कि बाल देखभाल संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए केंद्र की योजनाओं या दिशा-निर्देशों के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है या नहीं।
26 संस्थाओं में 156 सुरक्षा गार्ड का प्रस्ताव
सुनवाई में बताया गया कि राज्य की 26 बाल देखभाल संस्थाओं में कुल 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और किशोरों के भागने जैसी घटनाओं को रोकना है। हाई कोर्ट ने इस प्रस्ताव के लिए केंद्र से मिलने वाली संभावित आर्थिक सहायता पर जानकारी मांगी है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए यह संकेत दिया है कि बाल देखभाल संस्थाओं में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना जरूरी है। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से वित्तीय सहायता और केंद्र की संबंधित योजनाओं के संबंध में जवाब दाखिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।







