अमेरिका|फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट (राउंड ऑफ 32) मुकाबलों में एक तरफ जहां मैदान पर फुटबॉल के नए कीर्तिमान रचे जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मैदान के बाहर एक ऐतिहासिक जीत का जश्न खौफनाक त्रासदी में बदल गया। फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे ने जहां अपनी जादुई चमक से इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करा दिया, वहीं 40 साल बाद नॉकआउट मैच जीतने वाली सह-मेजबान मैक्सिको की टीम की ऐतिहासिक कामयाबी ने सड़कों पर ऐसा सैलाब लाया कि खुशी पल भर में मातम में तब्दील हो गई।
न्यू जर्सी में एमबाप्पे का तूफान, मेसी के रिकॉर्ड के बेहद करीब
न्यू जर्सी के खचाखच भरे स्टेडियम में पिछली बार की फाइनलिस्ट फ्रांस का सामना स्वीडन से था। इस राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे पूरी तरह से स्वीडिश डिफेंस पर हावी रहे। एमबाप्पे ने मैच के 45वें और 74वें मिनट में दो लाजवाब गोल दागकर फ्रांस को 3-0 की एकतरफा जीत दिला दी और टीम को राउंड ऑफ 16 में पहुंचा दिया। मैच का दूसरा गोल ब्रैडली बारकोला ने दागा।
इस मुकाबले में फ्रांस के कोच दिदिए देशां अपनी मां के अंतिम संस्कार के ठीक बाद सीधे टीम के साथ जुड़े थे। मैच के आखिरी पलों में जब एमबाप्पे को सबस्टीट्यूट किया गया, तो कोच देशां ने झुककर उनके खेल का अभिवादन किया। फ्रांस का अगला मुकाबला अब 5 जुलाई को पैराग्वे से होगा।
एमबाप्पे ने रच दिया इतिहास:
- नॉकआउट किंग: एमबाप्पे अब वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबलों में सबसे ज्यादा गोल (10 गोल) करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने ब्राजील के दिग्गज रोनाल्डो और लियोनिडास (8-8 गोल) को पीछे छोड़ दिया है।
- मेसी की बराबरी: इस वर्ल्ड कप में एमबाप्पे का यह तीसरा डबल गोल (ब्रेस) था। इस एडिशन में अब उनके 6 गोल हो चुके हैं, जिसके साथ उन्होंने गोल्डन बूट की रेस में लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली है।
- ऑल-टाइम रिकॉर्ड की दहलीज पर: वर्ल्ड कप करियर में एमबाप्पे के कुल 18 गोल हो चुके हैं। वे अब अर्जेंटीना के महान लियोनेल मेसी के ऑल-टाइम वर्ल्ड रिकॉर्ड (19 गोल) से महज एक कदम दूर हैं।
मैक्सिको का ऐतिहासिक ‘चमत्कार’: 40 साल का सूखा खत्म
दूसरी तरफ, मैक्सिको के एस्टेडियो एज़्टेका में इतिहास रचा जा रहा था। सह-मेजबान मैक्सिको ने एक बेहद कड़े मुकाबले में इक्वाडोर को 2-0 से शिकस्त दी। मैक्सिको के लिए जूलियन क्विन्योनेस ने 22वें और राउल जिमेनेज ने 31वें मिनट में गोल दागकर देश को वो खुशियां दीं, जिसका इंतजार वे पिछले 40 सालों से कर रहे थे। 1986 के बाद यह पहली बार है जब मैक्सिको ने वर्ल्ड कप का कोई नॉकआउट मैच जीता है। मैच के आखिरी पलों (इंजरी टाइम) में इक्वाडोर के पिएरो हिनकापिए को रेड कार्ड भी दिखाया गया। मैक्सिको अब 6 जुलाई को अगले राउंड का मुकाबला खेलेगी।
सड़कों पर उतरा लाखों का सैलाब, जश्न के बीच दम घुटने से मौत
जैसे ही रेफरी ने अंतिम सीटी बजाई, पूरा मैक्सिको सिटी झूम उठा। 40 साल के सूखे के खत्म होने की खुशी में लाखों की तादाद में फैंस सड़कों पर उतर आए। मैक्सिको सिटी का मशहूर ‘एंजेल ऑफ इंडिपेंडेंस’ चौराहा और ‘पासेओ दे ला रिफॉर्मा’ इलाका इंसानी समंदर में तब्दील हो गया। लोग नाच रहे थे, गा रहे थे और आतिशबाजी कर रहे थे।
लेकिन यह बेकाबू उत्साह जल्द ही एक खौफनाक हादसे में बदल गया। भीड़ इतनी ज्यादा अनियंत्रित हो गई कि कई इलाकों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक: अत्यधिक भीड़ और भारी उमस के कारण लोगों का दम घुटने लगा। इस हादसे में एक 44 वर्षीय पुरुष और एक 19 वर्षीय युवती की मौके पर ही दम घुटने (Suffocation) से मौत हो गई, जबकि एक अन्य महिला ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ जीत के जश्न के वीडियो वायरल हो रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पैरामेडिक्स और इमरजेंसी टीमों द्वारा सड़कों पर बेसुध पड़े फैंस को सीपीआर (CPR) देने की दिल दहला देने वाली तस्वीरें भी सामने आईं। मैक्सिको सिटी की मेयर क्लारा ब्रुगाडा ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और फैंस से जिम्मेदारी और सावधानी के साथ जश्न मनाने की अपील की है।











