रायगढ़। कलेक्टर के निर्देश पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा जिले में संचालित औद्योगिक इकाइयों और कारखानों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर श्रम न्यायालय, रायगढ़ में प्रस्तुत किए गए। इन मामलों की सुनवाई के बाद जून 2026 में श्रम न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए विभिन्न औद्योगिक इकाइयों पर कुल 8 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।

सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों के उल्लंघन पर कार्रवाई
उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद श्रम न्यायालय ने कई मामलों में कारखाना प्रबंधन को दोषी ठहराया। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

एन.आर. इस्पात एंड पावर पर 1 लाख का जुर्माना
मेसर्स एन.आर. इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दायर प्रकरण में न्यायालय ने कारखाना प्रबंधन को दोषी पाते हुए 1 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। यह प्रकरण औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा 27 अप्रैल 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।

जिंदल पावर लिमिटेड पर 3 लाख का अर्थदंड
इसी प्रकार मेसर्स जिंदल पावर लिमिटेड के खिलाफ 8 जुलाई 2025 को दायर मामले में श्रम न्यायालय ने प्रबंधन को दोषी मानते हुए 3 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।

मित्तल स्टोन क्रशर पर 1.50 लाख का जुर्माना
मेसर्स मित्तल स्टोन क्रशर के खिलाफ 12 जून 2024 को दर्ज मामले में न्यायालय ने कारखाना प्रबंधन को दोषी पाते हुए 1 लाख 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
अंजनी स्टील लिमिटेड के दो मामलों में भी सजा
मेसर्स अंजनी स्टील लिमिटेड के खिलाफ दायर दो अलग-अलग मामलों में भी न्यायालय ने कारखाना प्रबंधन को दोषी ठहराया। दोनों मामलों में क्रमशः 2 लाख रुपये और 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। ये प्रकरण 30 जुलाई 2025 और 20 फरवरी 2026 को श्रम न्यायालय में प्रस्तुत किए गए थे।
कुल 8 लाख रुपये का अर्थदंड
इस तरह श्रम न्यायालय, रायगढ़ ने जून 2026 में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े इन मामलों में संबंधित उद्योग प्रबंधन पर कुल 8 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा नियमों और श्रम कानूनों के उल्लंघन पर आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।









