छात्रावास-आश्रमों में सुविधाएं और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
रायपुर। आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने प्रदेश के आश्रम-छात्रावासों में शैक्षणिक सुविधाओं, पोषण और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में उन्होंने छात्रावासों और आश्रमों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बच्चों के बेहतर पोषण के लिए शुरू होगी विशेष पहल
बैठक में प्रमुख सचिव ने राज्य के 1000 आश्रम-छात्रावासों में पोषण वाटिकाएं विकसित करने के निर्देश दिए। इस पहल का उद्देश्य छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को ताजे, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण फल एवं सब्जियां उपलब्ध कराना है। विभाग का मानना है कि इससे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार होगा।
फलदार वृक्षों और सब्जियों की होगी खेती
पोषण वाटिकाओं में आम, अमरूद, जामुन, पपीता, सीताफल और केला जैसे फलदार वृक्ष लगाए जाएंगे। इसके अलावा भिंडी, टमाटर, करेला, लौकी, आलू, प्याज और मुनगा जैसी पौष्टिक सब्जियों की भी खेती की जाएगी। इससे छात्रावासों को ताजा और जैविक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
आत्मनिर्भरता और पोषण सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
अधिकारियों के अनुसार, पोषण वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें बागवानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। यह पहल आश्रम-छात्रावासों को आंशिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
नियमित मॉनिटरिंग पर रहेगा विशेष जोर
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्रावास-आश्रमों में शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।








