ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त मौजूद होने के बावजूद नहीं मिला समय पर उपचार, गंभीर लापरवाही उजागर
दुर्ग। दुर्ग जिले के जिला अस्पताल में सिकलिन पीड़िता युवती दीपिका गाढ़ा की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की विस्तृत जांच के बाद दो डॉक्टरों सहित कुल 7 लोगों पर कार्रवाई की गई है। जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद कई संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई है, जबकि कुछ अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। लगभग 20 दिनों तक चली जांच में अस्पताल प्रबंधन और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को समय पर रक्त नहीं दिया गया। परिजनों को ब्लड बैंक भेजकर डोनर लाने के लिए कहा गया, लेकिन प्रयासों के बावजूद कोई डोनर उपलब्ध नहीं हो सका। इसी देरी और लापरवाही के चलते मरीज की हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ की ओर से गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसे सिस्टम की बड़ी चूक माना गया है। इसी आधार पर रेडक्रॉस सोसायटी से जुड़े दो लैब टेक्नीशियन और एनएचएम से नियुक्त दो स्टाफ नर्सों की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे थे और मामला राजनीतिक एवं सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में रहा। प्रशासन ने अब जिम्मेदारों की पहचान कर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।









