नई दिल्ली / इस्लामाबाद|जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते बंद हों और सरहद पर सन्नाटे के बीच तनाव की सुगबुगाहट हो, तब एक बंद लिफाफा दिल्ली और इस्लामाबाद के सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर देता है। भारत और पाकिस्तान की 117 सबसे रसूखदार और प्रमुख हस्तियों ने एक साथ आकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नाम एक खुली और बेहद संवेदनशील चिट्ठी भेजी है। इस चिट्ठी में दोनों मुल्कों के बीच जारी दशकों पुरानी दुश्मनी को हमेशा के लिए खत्म करने और नए सिरे से बातचीत शुरू करने की पुरजोर वकालत की गई है।
‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ द्वारा जारी की गई इस संयुक्त अपील ने एक बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया है—क्या दोनों देशों के हुक्मरान इस आवाज को सुनकर इतिहास बदलने की शुरुआत करेंगे, या फिर यह खत भी पुरानी फाइलों की तरह कूटनीति के किसी ठंडे बस्ते में दफन हो जाएगा?
सरहद के आर-पार से उठी एक सुर में आवाज
इस खत के पीछे दोनों देशों के 117 ऐसे बड़े चेहरे हैं जिनकी अपनी-अपनी विधाओं में गहरी पैठ है। भारत की तरफ से 61 और पाकिस्तान की तरफ से 56 नामचीन लोगों ने इस पर अपने डिजिटल हस्ताक्षर किए हैं।
- भारत से प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता: नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक, राजद सांसद प्रो. मनोज झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर और हुमायूं कबीर।
- पाकिस्तान से मुख्य चेहरे: पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, नेशनल असेंबली के सदस्य इस्फनयार भंडारा और मशहूर परमाणु वैज्ञानिक डॉ. परवेज हूदभॉय।
“2 अरब लोगों के भविष्य को दुश्मनी की बलि नहीं चढ़ा सकते”
इस ऐतिहासिक खत में साफ तौर पर लिखा गया है कि भारत और पाकिस्तान मिलकर पूरी दुनिया की लगभग एक-पांचवीं (करीब 20%) आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों मुल्कों के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, लेकिन लगातार जारी तनाव, अविश्वास और दुश्मनी के चलते इन करोड़ों युवाओं का भविष्य, रोजगार और खुशहाली दांव पर लगी है।
“दशकों के अलगाव ने हमारी सामूहिक क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचाया है। हम किसी राजनीतिक एजेंडे का समर्थन नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह लगभग दो अरब लोगों के उज्जवल भविष्य, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के हक में की गई एक मानवीय अपील है।” – खत का एक मुख्य अंश
कूटनीति की दीवारें गिराने के लिए दिए 6 बड़े सुझाव
इस पत्र में सिर्फ शांति की बात नहीं की गई, बल्कि ठप्प पड़े रिश्तों की गाड़ी को दोबारा पटरी पर लाने के लिए दोनों प्रधानमंत्रियों के सामने 6 बेहद महत्वपूर्ण कदम सुझाए गए हैं:
- हाई कमिश्नर्स की दोबारा तैनाती: नई दिल्ली और इस्लामाबाद में पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल किए जाएं और दोनों देशों में दोबारा उच्चायुक्तों (High Commissioners) को नियुक्त किया जाए।
- वीजा सेवाओं की बहाली: दोनों देशों के आम नागरिकों, परिवारों और पर्यटकों के लिए वीजा नियमों को सामान्य और सुलभ बनाया जाए।
- कमर्शियल फ्लाइट्स के लिए एयरस्पेस खोलना: हवाई रास्तों (Airspace) को दोबारा खोला जाए ताकि दोनों देशों के बीच यात्रा का समय और खर्च कम हो सके।
- व्यापार और कनेक्टिविटी की वापसी: अटारी-वाघा जमीनी सीमा को व्यापार और यात्रा के लिए पूरी तरह खोला जाए और ‘श्रीनगर-मुजफ्फरबाद बस सेवा’ जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं को पुनर्जीवित किया जाए।
- धार्मिक कॉरिडोर का विस्तार: करतारपुर साहिब कॉरिडोर का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ पाकिस्तान की नीलम घाटी में स्थित कश्मीरी पंडितों के पवित्र स्थल ‘शारदा पीठ’ के दर्शन की अनुमति दी जाए।
- कश्मीर मुद्दे पर दोबारा मंथन: साल 2004 से 2007 के बीच दोनों देशों के बीच हुए समग्र वार्ता (Composite Dialogue) के फ्रेमवर्क को आधार बनाकर जम्मू-कश्मीर समेत सभी विवादों पर फिर से बातचीत शुरू हो और सीमा पर सेनाओं को पीछे (Demilitarisation) धकेला जाए।
सस्पेंस: क्या पिघलेगी कूटनीतिक बर्फ?
पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमलों और सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। भारत का हमेशा से यह कड़ा और साफ स्टैंड रहा है कि “आतंकवाद और बातचीत दोनों एक साथ नहीं चल सकते।”
ऐसे नाजुक मोड़ पर जब कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह जाम हैं, बैकचैनल (Track 2) वार्ताओं की कोशिशों के बीच 117 दिग्गजों की यह सामूहिक हुंकार सीधे दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के टेबल पर पहुंची है। अब देखना यह है कि क्या पीएम मोदी और पीएम शहबाज शरीफ इस चिट्ठी पर कोई ठोस कदम उठाएंगे, या सरहद के दोनों तरफ के करोड़ों लोग इस ठंडी कूटनीतिक जंग में यूं ही पिसते रहेंगे। फैसला अब पूरी तरह से दिल्ली और इस्लामाबाद के हाथों में है।









