ठगी की रकम छिपाने और ट्रांसफर करने में इस्तेमाल हो रहे थे बैंक खाते, मोबाइल और दस्तावेज जब्त
दुर्ग। साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और छिपाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
साइबर अपराधियों के लिए उपलब्ध कराते थे बैंक खाते
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी ठगी से प्राप्त रकम को सीधे अपने खाते में लेने के बजाय ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसका स्रोत छिपाने का प्रयास किया जाता है।
दुर्ग पुलिस ने इसी नेटवर्क को निशाना बनाते हुए कार्रवाई की है।
समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर जांच
भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए संदिग्ध बैंक खातों की जांच की गई।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कई बैंक खातों में साइबर अपराध से जुड़ी राशि जमा हुई थी और बाद में उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया।
खाताधारकों की भूमिका आई सामने
पुलिस जांच में सामने आया कि संबंधित खाताधारकों ने अपने बैंक खाते स्वयं या अन्य लोगों के साथ मिलकर साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए उपलब्ध कराए थे।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया।
BNS की धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए ऐसे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।











