निचली अदालत के फैसले को दी गई थी चुनौती, शर्तों के साथ जमानत पर रिहाई का आदेश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने मामले में 8 याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई वास्तविक कारावास की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है।

8 लोगों ने दायर की थी अपील
मामले में कन्हैया दुबे, शिवमंगल गोंड, तारा सिंह, गणेश्वर प्रसाद पांडेय, जगदीश सिंह, जय सिंह, मणिक्रम और माधव सिंह मरकाम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए सजा पर रोक लगाने और जमानत दिए जाने की मांग की थी।

अपील के अंतिम निर्णय में लग सकता है समय
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि निचली अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई है। अपील के अंतिम निराकरण में समय लग सकता है, इसलिए इस अवधि के दौरान उन्हें जमानत का लाभ दिया जाए और सजा को निलंबित किया जाए।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और परिस्थितियों का किया अवलोकन
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रकरण के तथ्यों, परिस्थितियों और रिकॉर्ड में उपलब्ध सामग्री का अवलोकन किया। अदालत ने कहा कि अपील के अंतिम निर्णय में संभावित समय को देखते हुए अपील लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ताओं को जमानत पर रिहा करना उचित होगा।
शर्तों के साथ मिली जमानत
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को सुनाई गई वास्तविक कारावास की सजा अपील के लंबित रहने तक निलंबित रहेगी। हालांकि, अदालत ने जमानत पर रिहाई के लिए विभिन्न शर्तें निर्धारित की हैं।









