हिंदू विवाह अधिनियम के तहत दूसरा विवाह अवैध होने से पेंशन का अधिकार खत्म नहीं होता: हाईकोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत भले ही अवैध माना जाए, लेकिन पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के अधिकार से स्वतः वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कल्याणकारी प्रावधान हैं। इसलिए इन नियमों की व्याख्या उदार और सामाजिक सुरक्षा की भावना के अनुरूप की जानी चाहिए।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का आदेश निरस्त
हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा 4 सितंबर 2021 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि दूसरी पत्नी अन्नपूर्णा पांडेय को 12 सप्ताह के भीतर फैमिली पेंशन और उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं।

कर्मचारी की मौत के बाद हुआ था समझौता
यह मामला गुंडाधुर कृषि अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर में सहायक लेखाकार के पद पर कार्यरत रहे मनोकांत पांडेय से जुड़ा है। पहली पत्नी पुष्पलता उपाध्याय के जीवित रहते उन्होंने अन्नपूर्णा पांडेय से दूसरा विवाह किया था। इस विवाह से उनकी तीन बेटियां हैं।

11 सितंबर 2007 को कर्मचारी की मृत्यु के बाद दोनों पत्नियों के बीच सिविल कोर्ट में समझौता हुआ था। समझौते के तहत पहली पत्नी को फैमिली पेंशन, जबकि दूसरी पत्नी को भविष्य निधि की राशि और अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार दिया गया था।
दूसरी पत्नी को मिली थी अनुकंपा नियुक्ति
समझौते के बाद अन्नपूर्णा पांडेय को 24 जून 2010 को सहायक ग्रेड-1 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद अन्नपूर्णा पांडेय ने फैमिली पेंशन की मांग की, लेकिन विश्वविद्यालय ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद दूसरी पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फैमिली पेंशन और सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया।








