फर्जी एनओसी के सहारे 32 हजार किलो खैर लकड़ी की तस्करी का आरोप, मुख्य आरोपी अब भी फरार
रायपुर। छत्तीसगढ़ की बेशकीमती वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले कथित लकड़ी तस्करी नेटवर्क ‘पुष्पा सिंडिकेट’ मामले में मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल को बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद पुलिस और वन विभाग की टीम फरार आरोपी और उसके सहयोगियों की तलाश में जुट गई है।

32 हजार किलो खैर लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा गया
मामला महासमुंद जिले के पिथौरा थाना क्षेत्र का है, जहां वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए करीब 32 हजार किलोग्राम खैर लकड़ी से भरा एक ट्रक जब्त किया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह खेप हिमाचल प्रदेश भेजी जा रही थी।

फर्जी एनओसी का हुआ खुलासा
लकड़ी के परिवहन के लिए कर्नाटक वन विभाग की ओर से जारी बताई गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्रस्तुत की गई थी। हालांकि, जांच के दौरान महासमुंद वन विभाग ने दस्तावेजों की पड़ताल की और एनओसी को फर्जी पाया। इसके बाद पूरे कथित तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
जांच एजेंसियों के सामने गिरफ्तारी की चुनौती
अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब जांच एजेंसियों के लिए मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल और उसके अन्य फरार साथियों की गिरफ्तारी प्राथमिकता बन गई है। मामले में पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं।
वन संपदा की सुरक्षा पर सख्ती
अधिकारियों का कहना है कि वन संपदा की अवैध कटाई और तस्करी से जुड़े मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की जांच जारी है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।








