बिलासपुर हाईकोर्ट ने खारिज की आपराधिक अपील, ट्रायल कोर्ट के फैसले पर लगाई मुहर
बिलासपुर। पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आरोपी हरिश्चंद्र खुंटे को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने आरोपी की आपराधिक अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।
मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष का दावा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष के प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की गवाही मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों से पूरी तरह पुष्ट होती है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
पति-पत्नी के बीच लंबे समय से था विवाद
अभियोजन के अनुसार, 11 मार्च 2020 को गौरी बाई खुंटे अपनी ड्यूटी के लिए किम्स अस्पताल गई थीं। बताया गया कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से संबंध सामान्य नहीं थे। घटना वाले दिन हरिश्चंद्र ने गौरी से अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने ड्यूटी समाप्त होने के बाद आने की बात कही। इसी विवाद के बाद आरोपी ने पत्नी की हत्या कर दी थी।
उम्रकैद की सजा रहेगी जारी
हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि हरिश्चंद्र खुंटे को ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा यथावत रहेगी और उसे जेल में ही सजा काटनी होगी। अदालत के इस फैसले को हत्या के मामलों में साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करने वाला माना जा रहा है।








