सीएसपीडीसीएल और ऊर्जा विभाग से मांगा शपथपत्र, 23 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
बिलासपुर। कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव में करंट लगने से हुई तीन लोगों की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) के प्रबंध निदेशक और ऊर्जा विभाग के सचिव को विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर मांगी जानकारी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि शपथपत्र में विद्युत अधोसंरचना (इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) के निरीक्षण और रखरखाव की वर्तमान व्यवस्था, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों तथा लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया का पूरा विवरण दिया जाए।
मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।
इलेक्ट्रिक फेंसिंग से हो रही हैं लगातार दुर्घटनाएं
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक फेंसिंग के कारण बार-बार हो रही मौतें गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी नीति और ठोस सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
कोर्ट ने जताई चिंता
खंडपीठ ने कहा कि कई मामलों में लोग अपनी फसल, पशुधन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए खेतों, फार्महाउस, घरों तथा अन्य परिसरों में बिजली प्रवाहित फेंसिंग लगा देते हैं। इसके संपर्क में आने वाले अनजान लोगों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ता है और कई बार उनकी जान तक चली जाती है।
भविष्य में हादसे रोकने पर जोर
हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य स्तर पर व्यापक दिशा-निर्देश और सुरक्षा मानकों की जरूरत है। अदालत ने संबंधित विभागों से जवाब तलब कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
भाड़म गांव में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद हाईकोर्ट की सक्रियता को विद्युत सुरक्षा और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।











