नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भरण्डा गांव में धर्मांतरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गांव के 26 ईसाई परिवारों को ग्रामीणों ने कथित तौर पर गांव छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। आरोप है कि ग्रामीणों ने साफ कह दिया कि यदि गांव में रहना है तो स्थानीय देवी-देवताओं और पारंपरिक रीति-रिवाजों को मानना होगा, अन्यथा गांव में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालात तनावपूर्ण होने के बाद प्रशासन ने गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
गांव की सीमा पर रोक, लौटने नहीं दिया
जानकारी के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद ग्रामीणों ने गांव की सीमाओं पर लकड़ियां और अवरोध लगाकर बाहर निकाले गए परिवारों की वापसी रोक दी। बेघर हुए परिवार फिलहाल गांव के बाहर श्मशान घाट के पास पुलिस सुरक्षा में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की हिंसा या अप्रिय घटना को रोका जा सके।
ग्रामीणों का क्या है आरोप?
ग्रामीणों का आरोप है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले कुछ परिवार गांव की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं, स्थानीय देवी-देवताओं और आदिवासी संस्कृति का सम्मान नहीं करते। इसी वजह से ग्राम सभा में उनके खिलाफ विरोध बढ़ा और उन्हें गांव छोड़ने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जो लोग गांव की परंपराओं को स्वीकार करेंगे, उन्हें ही गांव में रहने दिया जाएगा।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने पूरे गांव को सुरक्षा घेरे में ले लिया है। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति बहाल करने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
नारायणपुर और बस्तर क्षेत्र में धर्मांतरण को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। अतीत में भी ईसाई परिवारों के विस्थापन और सामाजिक तनाव की घटनाएं हुई हैं। इस ताजा घटनाक्रम के बाद एक बार फिर क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक तनाव बढ़ गया है।








