हाथियों की बढ़ती संख्या के बीच संरक्षण पर उठे सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण को लेकर वन विभाग के दावों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रदेश में पिछले 25 दिनों के भीतर चार हाथी शावकों की मौत हो चुकी है, जबकि बीते छह महीनों में 10 शावकों ने अपनी जान गंवाई है। लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण की मौजूदा रणनीतियों की प्रभावशीलता पर चिंता बढ़ा दी है।
वन विभाग ड्रोन निगरानी, विशेष गश्त और आधुनिक तकनीकों के उपयोग का दावा करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों की मौत के वास्तविक और वैज्ञानिक कारणों की गहन जांच आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और संरक्षण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
चार वर्षों में लगभग दोगुनी हुई हाथियों की संख्या
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2022 में प्रदेश में लगभग 240 हाथी थे, जिनकी संख्या बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 हो गई है। विभाग इसे संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता मान रहा है। हालांकि, हाथियों की बढ़ती आबादी के साथ मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं, जो अब गंभीर चुनौती बन चुकी हैं।
राष्ट्रीय कार्यशाला में बनी रणनीति, लेकिन जमीन पर नहीं दिखा असर
मानव-हाथी संघर्ष से निपटने और हाथियों के वैज्ञानिक प्रबंधन की रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से हाल ही में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें विशेषज्ञों ने हाथियों की आवाजाही, सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में संघर्ष कम करने के उपायों पर चर्चा की थी।
हाईटेक और पारंपरिक उपाय भी रहे विफल
वन विभाग ने हाथियों को गांवों से दूर रखने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कई आधुनिक और पारंपरिक उपाय अपनाए। इनमें सैटेलाइट आधारित एलिफेंट एप, रेडियो कॉलर, ड्रोन निगरानी, मधुमक्खी पालन, सोलर फेंसिंग तथा कर्नाटक से प्रशिक्षित हाथियों को लाने जैसी योजनाएं शामिल थीं।
इसके अलावा चारागाह विकसित करने, खेतों में पुतले लगाने और ग्रामीणों को जागरूक करने के प्रयास भी किए गए, लेकिन अधिकांश योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। परिणामस्वरूप हाथियों का गांवों में प्रवेश और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
वैज्ञानिक जांच और दीर्घकालिक योजना की जरूरत
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि केवल निगरानी और अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। हाथियों की मौत के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण, उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण, सुरक्षित कॉरिडोर का विकास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी ही दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकते हैं।
लगातार हो रही शावकों की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हाथियों की संख्या बढ़ना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उनकी सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना भी है।







