शासकीय चारागाह भूमि को निजी नाम पर दर्ज कर बेचने का दावा
रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे ग्राम डोमा में करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय घास भूमि की कथित बिक्री और राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि लगभग 3 एकड़ शासकीय चारागाह भूमि को निजी नाम पर दर्ज कर उसकी बिक्री कर दी गई। मामले की शिकायत रायपुर कलेक्टर से करते हुए विस्तृत जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
वर्ष 1955 से चारागाह भूमि के रूप में दर्ज थी जमीन
शिकायतकर्ता बलबीर सिंह के अनुसार, खसरा नंबर 6/2 की भूमि वर्ष 1955 के राजस्व अभिलेखों में शासकीय घास (चारागाह) भूमि के रूप में दर्ज थी। उनका दावा है कि वर्ष 1994 तक यह भूमि लगातार सरकारी चारागाह के रूप में रिकॉर्ड में दर्ज रही।
बंटांकन के बाद रिकॉर्ड में बदलाव का आरोप
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1992 में संबंधित खसरे का बंटांकन कर उसे खसरा नंबर 6 में शामिल किया गया था। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड में कथित रूप से बदलाव किए जाने और भूमि को निजी स्वामित्व में दर्ज करने की आशंका जताई गई है।
कई वर्षों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का दावा
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्ष 1995 से 1998 के बीच का राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। उनका कहना है कि रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और भूमि की स्थिति में बदलाव की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच की मांग
बलबीर सिंह ने कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में पूरे प्रकरण की राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर पर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह पता लगाने की भी मांग की है कि शासकीय भूमि को निजी नाम पर दर्ज करने की प्रक्रिया कैसे हुई और किन अधिकारियों अथवा व्यक्तियों की इसमें भूमिका रही।
जांच के बाद सामने आएंगे तथ्य
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। शिकायत मिलने के बाद संबंधित दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों की जांच किए जाने की संभावना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।










