
पुलिस अभिरक्षा में 8 घंटे की मिली छूट
Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए डकैती और आपराधिक साजिश के मामले में सजा काट रहे एक कैदी को अपनी बहन के विदाई समारोह में शामिल होने की अनुमति प्रदान की है। हालांकि अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया, लेकिन पुलिस अभिरक्षा में आठ घंटे के लिए समारोह में शामिल होने की अनुमति दी गई।
न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ का आदेश
यह आदेश बिलासपुर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ द्वारा पारित किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को निर्धारित शर्तों के साथ पुलिस सुरक्षा में ही कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।
मनीष बंसोर से जुड़ा है मामला
यह मामला भिलाई के सुपेला थाना क्षेत्र स्थित कृष्णानगर निवासी 29 वर्षीय मनीष बंसोर से जुड़ा है। मनीष को दुर्ग की विशेष अदालत ने 18 नवंबर 2025 को डकैती और आपराधिक साजिश के मामले में दोषी ठहराया था।
7 और 10 वर्ष की सजा काट रहा है कैदी
विशेष अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत 7 वर्ष और धारा 397 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में वह जेल में बंद है और अपनी सजा काट रहा है।
मानवीय आधार पर अदालत का फैसला
अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए यह मानवीय निर्णय दिया कि कैदी को सीमित समय के लिए पुलिस निगरानी में पारिवारिक समारोह में शामिल होने की अनुमति दी जाए।










