बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 34 साल पुराने एक मामले में पुलिस जांच में कथित लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने तीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई न होने पर राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला वर्ष 1992 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा हुआ है।
1992 के पुराने मामले से जुड़ा विवाद
मामला एक पुरानी एफआईआर से संबंधित है, जिसकी जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ता मनोहरलाल चौधरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस 34 साल पुराने मामले को रद्द करने की मांग की थी।
जांच में खामियां उजागर, DSP की भूमिका पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की जांच में कई खामियां सामने आईं, जिसके बाद तीन डीएसपी रैंक के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे। इसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
DGP की रिपोर्ट पर भी कोर्ट असंतुष्ट
राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि DGP ने 12 जून 2026 को एक अनुशंसा गृह विभाग को भेजी है, जिसमें दोषी पाए गए तीन डीएसपी पर हल्की कार्रवाई की सिफारिश की गई है। फिलहाल यह मामला गृह विभाग के पास विचाराधीन है।
हाईकोर्ट ने मांगा शपथ पत्र
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि पुलिसिया कार्यप्रणाली में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने DGP को इस पूरे मामले में विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।










