रायपुर/दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण मजदूरों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ (वीबी-जी राम-जी) के तहत संशोधित मजदूरी दरों को अधिसूचित कर दिया है। यह नया कानून 1 जुलाई से पूरे देश में लागू हो गया है। इसके लागू होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और मजदूरी संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा।
राष्ट्रीय औसत मजदूरी में बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत राष्ट्रीय औसत मजदूरी बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है, जो पहले मनरेगा के तहत 298.8 रुपये प्रतिदिन थी। इस तरह मजदूरी में औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि दर्ज की गई है।
125 दिन तक रोजगार की वैधानिक गारंटी
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि नए अधिनियम के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिन के बजाय 125 दिन तक मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर और आय सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे।
सभी राज्यों में लागू नई दरें
मंत्रालय के अनुसार, 1 जुलाई से प्रभावी नई मजदूरी दरें देश के सभी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू कर दी गई हैं। इसके तहत कई राज्यों में मजदूरी को 300 रुपये प्रतिदिन की नई आधार दर तक पहुंचाया गया है, ताकि किसी भी क्षेत्र में न्यूनतम मजदूरी इससे कम न रहे।
कई राज्यों में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में लगभग 24.5 प्रतिशत की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार का कहना है कि इस नई योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और मजदूर वर्ग की आय में स्थिरता आएगी।










