10 रोजा कार्यक्रम अंतिम दौर में, तकरीरों और फातिहा ख्वानी से माहौल गमगीन
Bhilai। मुहर्रम के मौके पर करबला के शहीदों की याद में चल रहा 10 रोजा आयोजन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। शहर के विभिन्न इमामबाड़ों में परचमे इस्लाम फहराने के साथ-साथ फातिहा ख्वानी, नौहा, कुरआन ख्वानी, तकरीरी कार्यक्रम और मिलाद शरीफ का सिलसिला लगातार जारी है।
इमामबाड़ों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन
मुहर्रम के इस पावन अवसर पर ढोल, ताशे और अंजुमनों के अखाड़ों के खेलों के साथ धार्मिक माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इमामबाड़ों में उमड़ रही है और करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।
अंजुमन हुसैनिया कमेटी द्वारा विशेष तकरीर
सड़क-20, जोन-1, खुर्सीपार में अंजुमन हुसैनिया कमेटी की ओर से 8 मुहर्रम की रात विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सैयद आलमगीर अशरफ की तकरीर आयोजित की गई।
इस अवसर पर Syed Alamgir Ashraf ने करबला के ऐतिहासिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने उनकी तकरीर को ध्यानपूर्वक सुना।
हजरत इब्राहीम और इमाम हुसैन की कुर्बानी का जिक्र
अपने संबोधन में उन्होंने हजरत इब्राहीम (अ.स.) और उनके पुत्र हजरत इस्माइल (अ.स.) की कुर्बानी का उल्लेख करते हुए दुम्बा (भेड़) के आने की घटना को बताया। साथ ही उन्होंने करबला में हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी का भी विस्तार से वर्णन किया।
गमगीन माहौल में संपन्न हुआ कार्यक्रम
करबला के शहीदों की शहादत का बयान सुनकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम के अंत में सलाम पेश किया गया और फातिहा ख्वानी कर अमन-शांति और भाईचारे की दुआ मांगी गई।











