ABC और डिजीलॉकर एकीकरण से बदला उच्च शिक्षा का स्वरूप, छात्र अब कर पा रहे क्रेडिट का डिजिटल संरक्षण
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020) के तहत लागू ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने उच्च शिक्षा प्रणाली में बड़ा परिवर्तन ला दिया है। केंद्र और राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से सत्र 2023-24 में शुरू की गई यह व्यवस्था वर्ष 2026 तक पूरी तरह प्रभावी हो चुकी है।
क्या है ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’
‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ एक डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें छात्रों द्वारा अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट सुरक्षित रूप से संग्रहीत किए जाते हैं। इसे एक डिजिटल शैक्षणिक बैंक की तरह समझा जा सकता है, जहां छात्र की मेहनत “जमा” होती है और भविष्य में उसका उपयोग किया जा सकता है।
पढ़ाई बीच में छूटने पर भी नहीं होगा नुकसान
नई प्रणाली के तहत यदि कोई छात्र किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देता है, तो उसके पहले से अर्जित क्रेडिट समाप्त नहीं होते। ये सभी क्रेडिट उसकी ABC आईडी में सुरक्षित रहते हैं।
उदाहरण के तौर पर, बस्तर क्षेत्र का कोई छात्र यदि पारिवारिक कारणों से दूसरे वर्ष के बाद पढ़ाई रोक देता है, तो उसकी अब तक की पढ़ाई व्यर्थ नहीं जाएगी।
किसी भी विश्वविद्यालय से पूरी कर सकेंगे पढ़ाई
छात्र कुछ वर्षों बाद जब दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहे, तो वह राज्य या देश के किसी भी विश्वविद्यालय में सीधे आगे की कक्षा में प्रवेश ले सकता है। यह प्रणाली “मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट” मॉडल पर आधारित है, जो छात्रों को अधिक लचीलापन प्रदान करती है।
छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा का नया युग
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद छात्र अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रख पा रहे हैं। इससे न केवल पढ़ाई में निरंतरता बनी रहती है, बल्कि उच्च शिक्षा प्रणाली अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित बन रही है।
भविष्य की आधुनिक शिक्षा प्रणाली की ओर कदम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में शिक्षा को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और रोजगारोन्मुख बनाएगी। छात्रों को अब एक तरह की “डिजिटल यूनिवर्सिटी” की सुविधा मिल रही है, जो उनकी शिक्षा यात्रा को अधिक सरल और सुरक्षित बनाती है।








