प्रभावित ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन, प्रशासन पर पुनर्वास व्यवस्था पर सवाल
रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत सोमवार को 80 मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने के बाद मामला गरमा गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जो आवास दिए गए हैं, वे बेहद छोटे और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उनका आरोप है कि इन घरों में बड़े परिवारों का रहना संभव नहीं है, जिससे वे गंभीर आवास संकट का सामना कर रहे हैं।
कलेक्ट्रेट में भारी पुलिस बल तैनात, बैरिकेडिंग कर रोका गया
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर ग्रामीणों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की और उन्हें समझाइश देकर शांत करने का प्रयास किया।
इस दौरान स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
राजनीतिक हलचल भी तेज, कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी
इस प्रदर्शन में रायपुर जिला कांग्रेस के कई नेता भी शामिल हुए। उनकी मौजूदगी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल इस मुद्दे का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
कार्रवाई से पहले सांसद से हुई थी मुलाकात
जानकारी के अनुसार, कार्रवाई से दो दिन पहले ही ग्रामीणों ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की थी। सांसद ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बरसात के दौरान किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी और प्रशासन व ग्रामीणों के बीच समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
इसके बावजूद 29 जून को 80 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई कर दी गई, जिसके बाद से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है और मामला अब राजनीतिक व प्रशासनिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।










