तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता एक बार फिर गंभीर संकट में फंस गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को फिलहाल रोक दिया है। ईरानी अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी तरह के दबाव, धमकी या सैन्य चेतावनी के माहौल में बातचीत नहीं करेंगे।
स्विट्जरलैंड में हुई हालिया वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव खुलकर सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ हाथ मिलाने से भी इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, संयुक्त फोटो और अन्य औपचारिक कूटनीतिक गतिविधियों से भी दूरी बनाई गई। हालांकि बाद में मध्यस्थ देशों के प्रयासों से तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी।
ट्रम्प की चेतावनी से बढ़ा विवाद
तनाव की शुरुआत उस समय हुई जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान किसी भी समझौते का पालन नहीं करता तो अमेरिका “जो जरूरी होगा, वह करेगा।” ट्रम्प के इस बयान को ईरान ने सीधी धमकी बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। ईरान का कहना है कि सम्मानजनक माहौल के बिना कोई भी वार्ता सफल नहीं हो सकती।
ईरान का दो टूक संदेश
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश हमेशा बातचीत के पक्ष में रहा है, लेकिन धमकियों के बीच किसी भी तरह की वार्ता स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि अमेरिका वास्तव में समाधान चाहता है तो उसे पहले दबाव की नीति छोड़नी होगी और विश्वास बहाली की दिशा में कदम उठाने होंगे।
बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि दोनों देशों के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी रखने और आगे के लिए एक रूपरेखा तैयार करने पर काम किया जा रहा है। हालिया बैठकों में संघर्ष कम करने और कुछ विवादित मुद्दों पर आगे बातचीत की सहमति भी बनी है।
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर मध्य-पूर्व की सुरक्षा, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। यदि बातचीत दोबारा पटरी पर नहीं लौटती है तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।







