पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा और औषधीय ज्ञान के संरक्षण पर जोर
Raipur। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा 24 जून को रायपुर में वैद्यों के हितकारी योजनाओं की कार्ययोजना और भविष्य के रोडमैप को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को मजबूत करना और वैद्य समुदाय के हितों को सशक्त बनाना रहा।
बोर्ड अध्यक्ष ने की बैठक की अध्यक्षता
बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने की। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों और सुदूर अंचलों से आए 8 वैद्य संघों के लगभग 60 प्रतिनिधि वैद्यों ने भाग लिया। बैठक में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को संरक्षित करने और उसके विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई।
वैद्य समुदाय का किया गया सम्मान
बैठक के प्रारंभ में बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम एवं उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने सभी वैद्य प्रतिनिधियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस दौरान वैद्य समुदाय के पारंपरिक ज्ञान और उनके योगदान की सराहना की गई।
बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे. ए. सी. एस. राव ने बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और वैद्यों के संरक्षण एवं सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण पर विशेष जोर
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय ज्ञान को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से नियमित रूप से वैद्य सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 11 वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 1 राज्य स्तरीय, 6 संभाग स्तरीय और 4 जिला स्तरीय सम्मेलन शामिल हैं।
भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा
बैठक में वैद्य समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की कार्ययोजना और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को संरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।.










