अदालत ने कहा- उम्र तय करने के लिए सभी दस्तावेजों और चिकित्सीय साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन जरूरी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड में दर्ज उम्र को अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि दावा अधिकरण को किसी व्यक्ति की उम्र निर्धारित करते समय केवल आधार कार्ड पर निर्भर रहने के बजाय उपलब्ध सभी दस्तावेजी और चिकित्सीय साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना चाहिए।

तीन अपीलों पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत ने आपस में जुड़े तीन मोटर दुर्घटना मुआवजा अपील मामलों पर एक साथ फैसला सुनाया। इस दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के सरोज एवं अन्य बनाम इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया।

सड़क हादसे में एक पैर गंवाना पड़ा
मामला महासमुंद जिले में 19 अप्रैल 2019 को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। दुर्घटना में दो बाइक सवारों की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। हादसे के बाद घायल व्यक्ति का एक पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा।

आधार कार्ड के आधार पर उम्र 68 वर्ष मानी गई थी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि घायल व्यक्ति लगातार अपनी उम्र करीब 58 वर्ष बताता रहा था। वहीं, दिव्यांगता प्रमाणपत्र और उपचार से जुड़े दस्तावेजों में उसकी उम्र करीब 60 वर्ष दर्ज थी। इसके बावजूद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने केवल आधार कार्ड के आधार पर उसकी उम्र 68 वर्ष मान ली थी।
हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया को विधिसम्मत नहीं माना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसकी उम्र 61 से 65 वर्ष के आयु वर्ग में स्वीकार की।
मुआवजा 96 हजार से बढ़ाकर 3.90 लाख रुपये किया
अदालत ने मुआवजे की दोबारा गणना करते हुए घायल की मासिक आय 3,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये निर्धारित की। साथ ही कार्यात्मक दिव्यांगता को 35 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत माना गया।
इन आधारों पर कुल मुआवजा राशि 96,400 रुपये से बढ़ाकर 3,90,800 रुपये कर दी गई। इसके अलावा 2,94,400 रुपये पर अपील दायर करने की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया गया।
हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण कानूनी संदेश
इस फैसले से स्पष्ट है कि दुर्घटना मुआवजा मामलों में किसी व्यक्ति की उम्र तय करने के लिए केवल आधार कार्ड पर निर्भर नहीं किया जा सकता। अदालतों और दावा अधिकरणों को उम्र से संबंधित सभी उपलब्ध दस्तावेजों, चिकित्सीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना होगा।








