बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला, आरोपी की दोनों अपीलें खारिज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि पीड़िता कानूनन नाबालिग है, तो उसके साथ बनाए गए शारीरिक संबंधों में कथित सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता। अदालत ने कहा कि नाबालिग की सहमति को कानून मान्यता नहीं देता, इसलिए आरोपी को दुष्कर्म के अपराध से राहत नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट के जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की एकल पीठ ने बस्तर जिले के जगदलपुर सत्र न्यायालय द्वारा आरोपी अर्जुन मेहरा (19 वर्ष) को सुनाई गई 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड की सजा को बरकरार रखा। साथ ही आरोपी की ओर से दायर दोनों अपीलों को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भारतीय कानून के तहत नाबालिग की सहमति वैध नहीं मानी जाती। ऐसे मामलों में यदि पीड़िता की उम्र निर्धारित सीमा से कम है, तो कथित सहमति के आधार पर आरोपी को दुष्कर्म के आरोप से मुक्त नहीं किया जा सकता।

सत्र न्यायालय के फैसले पर लगी मुहर
हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर सुनाई गई सजा उचित है। इसलिए आरोपी को दी गई 7 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा और जुर्माना यथावत रहेगा।








