बिलासपुर| छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक शख्स ने अपने ही घर में आश्रय लेने आई 12 साल की मासूम बच्ची को बंधक बनाकर उसके साथ दरिंदगी (रेप) की वारदात को अंजाम दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर अपराध को छुपाने और कानून को धोखा देने के लिए आरोपी की पत्नी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। जब मामला खुला तो पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर सेंटर (CWC) के भी होश उड़ गए।
पत्नी का वो झूठ जिसने हाई कोर्ट को किया गुमराह
मामला तब और पेचीदा हो गया जब आरोपी की पत्नी ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की। उसने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका के जरिए कानूनी दांव-पेंच खेलकर कोर्ट के सामने झूठे तथ्य पेश किए, ताकि पीड़िता और उसके भाई को अपने कब्जे में लिया जा सके और सच कभी बाहर न आ पाए। हालांकि, जब चाइल्ड वेलफेयर सेंटर की टीम ने बच्चों को अपने संरक्षण में लेकर उनकी गहन काउंसलिंग की, तब जाकर इस भयावह सच की परतें खुलीं। बच्चों ने बताया कि उन्हें सहारा देने के बहाने घर में रखने वाले जीजा ने ही 12 साल की मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया और उसके भाई को लगातार प्रताड़ित किया।
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “बच्चों की मानसिक स्थिति सर्वोपरि”
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। मंगलवार को हाई कोर्ट के सख्त आदेश पर कोरिया की कलेक्टर रोक्तिमा यादव और अंबिकापुर के अपर कलेक्टर राम सिंह ठाकुर सहित महिला-बाल विकास विभाग के आला अधिकारियों ने दोनों भाई-बहन को कड़ी सुरक्षा के बीच हाई कोर्ट में पेश किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा:
“बच्चों का कल्याण और उनकी मानसिक स्थिति सर्वोपरि है। ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
बंद लिफाफे में मांगी रिपोर्ट, स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी को जिम्मा
हाई कोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा और उनके मानसिक तनाव को समझते हुए एक बेहद संवेदनशील फैसला लिया। कोर्ट ने निर्देश दिए कि बच्चों की काउंसलिंग सामान्य कोर्ट रूम के बजाय स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी के शांत माहौल में कराई जाए।
- विशेष निगरानी: एकेडमी की डायरेक्टर और सीनियर एडवोकेट नौशीना अली की देखरेख में बच्चों की विस्तृत काउंसलिंग पूरी की गई है।
- सीलबंद रिपोर्ट: बच्चों से बातचीत और उनकी स्थिति के आधार पर तैयार की गई अंतिम रिपोर्ट को एक बंद लिफाफे में सीधे हाई कोर्ट को सौंपा जाएगा।
- अगला कदम: फिलहाल हाई कोर्ट ने दोनों बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें चाइल्ड वेलफेयर सेंटर (शेल्टर होम) में ही सुरक्षित रखने का कड़ा आदेश दिया है और मामले की जांच तेज कर दी गई है।










