15 फर्जी प्रकरण बनाकर सरकारी सहायता राशि हड़पने का मामला, जांच में सामने आई अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका
बिलासपुर। सर्पदंश से मौत के फर्जी मामले तैयार कर सरकारी सहायता राशि हड़पने के मामले में सरकंडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने एसडीएम और तहसील कार्यालय में पदस्थ तीन बाबुओं को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से आदेश के बाद तीनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया।

आत्महत्या के मामले को बनाया सर्पदंश का फर्जी प्रकरण
सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के अनुसार, क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। इस मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया था। आरोप है कि इसी मर्ग नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए।

इसके बाद तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर, एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और गरीब बिंझवार की मदद से फर्जी सर्पदंश प्रकरण तैयार किया गया। इस प्रकरण को कलेक्टोरेट में प्रस्तुत कर शासन की ओर से मिलने वाली सहायता राशि हड़पने का आरोप है।

जिले में सामने आए 15 फर्जी मामले
शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने जिले में सर्पदंश से जुड़े मामलों की जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान जिले के अलग-अलग थानों में सर्पदंश से जुड़े 15 फर्जी प्रकरण सामने आए। इन मामलों में एसडीएम और तहसील कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच में सामने आई।

जांच के आधार पर सरकंडा पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार किया। न्यायालय में पेश करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है।
पहले डॉक्टर और वकील समेत पांच लोग हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में इससे पहले तोरवा पुलिस ने एक डॉक्टर और वकील समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी सहायता राशि हड़पने के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में अभी कई और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।







