सर्वोच्च न्यायालय और एनसीपीसीआर के निर्देशों के तहत हुआ त्रैमासिक निरीक्षण
बलौदाबाजार। सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के निर्देशों के अनुरूप बलौदाबाजार जिला जेल का त्रैमासिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एक ऐसा बंदी सामने आया, जिसने अपनी उम्र 18 वर्ष से कम बताई। मामले को गंभीर मानते हुए विशेषज्ञ समिति ने उसकी जन्मतिथि के सत्यापन और प्रकरण को किशोर न्याय बोर्ड को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नाबालिगों को वयस्क कैदियों के साथ रखने पर विशेष निगरानी
वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही के अंतर्गत यह निरीक्षण कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन और जिला कार्यक्रम अधिकारी अतुल परिहार के नेतृत्व में सोमवार को किया गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी परिस्थिति में नाबालिग बंदियों को वयस्क कैदियों के साथ जेल में निरुद्ध न रखा जाए।
430 बंदियों से की गई बातचीत
निरीक्षण के दौरान गठित विशेषज्ञ समिति ने जिला जेल में निरुद्ध कुल 430 बंदियों से बातचीत कर उनकी स्थिति की समीक्षा की। समिति ने विशेष रूप से उन बंदियों की पहचान की, जो प्रथम दृष्टया 18 वर्ष से कम आयु के प्रतीत हो रहे थे। इसके लिए समिति के सदस्य जेल की विभिन्न बैरकों में पहुंचे और बंदियों से व्यक्तिगत चर्चा की।
बंदी ने बताई 2008 की जन्मतिथि
जांच के दौरान एक बंदी ने अपनी जन्मतिथि 09 अक्टूबर 2008 बताई। उसने समिति को बताया कि वह पिछले करीब दो महीने से जिला जेल में निरुद्ध है। बंदी के इस बयान के बाद समिति ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए उसकी आयु से संबंधित दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के निर्देश दिए।
किशोर न्याय बोर्ड को भेजा जा सकता है मामला
विशेषज्ञ समिति ने स्पष्ट किया कि यदि दस्तावेजों के सत्यापन में बंदी की आयु 18 वर्ष से कम पाई जाती है, तो नियमानुसार उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बाल संरक्षण से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का पालन हो।
बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए जारी रहेगी निगरानी
प्रशासन का कहना है कि जेलों में निरुद्ध व्यक्तियों की आयु और कानूनी स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी नाबालिग के अधिकारों का उल्लंघन न हो। निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाएगी।








