बारिश से पहले पेयजल स्रोतों को जीवाणुरहित बनाने पर जोर
जगदलपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग, जगदलपुर मंडल द्वारा बस्तर संभाग के चार जिलों में सघन क्लोरीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। वर्षा ऋतु के आगमन से पहले शुरू किए गए इस अभियान के तहत बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में स्थापित हैंडपंपों एवं नल-जल योजनाओं का व्यापक स्तर पर क्लोरीनेशन किया जा रहा है।
गांव-गांव पहुंच रहा विभागीय अमला
अभियान के दौरान विभाग के मैदानी कर्मचारी संबंधित क्षेत्रों के गांवों में पहुंचकर पेयजल स्रोतों को जीवाणुरहित बनाने की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इसका उद्देश्य मानसून के दौरान जलजनित बीमारियों की आशंका को कम करना और ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों के अनुसार, हैंडपंपों और नल-जल योजनाओं में क्लोरीन का उपयोग कर पानी में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट किया जा रहा है, जिससे पेयजल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।
महिला जल वाहिनी की अहम भूमिका
अभियान में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। विशेष रूप से महिला जल वाहिनी की सक्रिय सहभागिता देखने को मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन से महिलाओं का सीधा जुड़ाव होने के कारण वे लोगों को स्वच्छ पानी के उपयोग और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के प्रति जागरूक कर रही हैं।महिलाओं की भागीदारी से अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल रही है और ग्रामीणों में स्वच्छ पेयजल के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर फोकस
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का यह अभियान मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में फैलने वाली जलजनित बीमारियों की रोकथाम को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है। विभाग का मानना है कि नियमित क्लोरीनेशन और जनजागरूकता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में पहल
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत सभी प्रमुख पेयजल स्रोतों की निगरानी की जा रही है और आवश्यकता अनुसार आगे भी क्लोरीनेशन का कार्य जारी रहेगा। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और लोगों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।








