SAFEMA के तहत जिले में पहली बार हुई बड़ी आर्थिक कार्रवाई
धमतरी। जिले में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नशा तस्करों की 35.85 लाख रुपये से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है। यह धमतरी जिले में पहली बार है जब SAFEMA (Smugglers and Foreign Exchange Manipulators Forfeiture of Property Act) के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों पर सीधा शिकंजा कसा गया है।
वित्तीय जांच में सामने आया अवैध निवेश का नेटवर्क
पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक धमतरी के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक और कोतवाली पुलिस ने विस्तृत वित्तीय जांच की। जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित धनराशि को बैंक खातों, बीमा योजनाओं, वाहनों और अचल संपत्तियों में निवेश किया था।
इसके बाद पुलिस ने सभी संपत्तियों को चिन्हित कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें फ्रीज कर दिया।
आरती रजक की 12.93 लाख रुपये की संपत्ति फ्रीज
पहले मामले में आरोपी आरती रजक के बैंक खातों और बीमा योजनाओं में निवेशित 12 लाख 93 हजार 636 रुपये मूल्य की संपत्तियों को फ्रीज किया गया। पुलिस का कहना है कि यह संपत्ति अवैध कारोबार से अर्जित आय से बनाई गई थी।
दूसरे मामले में 22.91 लाख रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई
दूसरे मामले में आरोपी करण सिंह धुरी, उषा बाई धुरी और जाइका धुरी की बैंक खातों, वाहन और अचल संपत्तियों सहित 22 लाख 91 हजार 479 रुपये मूल्य की संपत्तियों को फ्रीज किया गया है।
दोनों मामलों को मिलाकर कुल 35 लाख 85 हजार 116 रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई है।
एनडीपीएस और पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत पहले से दर्ज हैं मामले
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों के खिलाफ पहले से एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज हैं। इनके विरुद्ध पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत भी कार्रवाई की जा चुकी है। अब आर्थिक जांच के जरिए अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ वित्तीय कार्रवाई की जा रही है।
अवैध कारोबारियों के खिलाफ आगे भी जारी रहेगा अभियान
धमतरी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों की तस्करी और उससे अर्जित अवैध संपत्तियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए ऐसे मामलों में वित्तीय जांच को प्राथमिकता दी जाएगी।








