खरीफ सीजन से पहले किसानों को दी गई उन्नत जैविक खेती की जानकारी
गरियाबंद। जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही किसानों ने खरीफ फसलों की तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, गरियाबंद परिसर में जैविक कृषि कार्यशाला एवं किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया।
जैविक खेती के लाभों पर विशेषज्ञों ने डाला प्रकाश
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए किसान, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील कृषक, विभागीय अधिकारी और नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खेती की उन्नत तकनीकों, जैविक खाद एवं जैव उर्वरकों के उपयोग, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा जैविक उत्पादों के विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
विशेषज्ञों ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर भी चर्चा करते हुए बताया कि जैविक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो रही है।
उत्पादन लागत घटाने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की अपील
सम्मेलन में उपस्थित कृषि अधिकारियों ने किसानों से जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया। अधिकारियों ने कहा कि जैविक खेती से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
प्रगतिशील किसानों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के दौरान जैविक खेती कर रहे प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जैविक पद्धति अपनाने से फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और बाजार में उत्पादों का बेहतर मूल्य भी प्राप्त हो रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।
उत्कृष्ट जैविक किसानों का हुआ सम्मान
कार्यशाला के दौरान जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही किसानों की विभिन्न जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान कृषि विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
शासन की योजनाओं की दी जानकारी
सहायक संचालक कृषि अनिल कौशिक ने किसानों को जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में डॉ. मनीष चौरसिया, डॉ. देवेंद्र देवांगन, डॉ. सत्येंद्र पाटले, डॉ. शालू अब्राहम, डॉ. तुषार मिश्रा सहित अन्य कृषि वैज्ञानिक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।








