राष्ट्रीय अवकाश के कारण लोग घरों में थे, तभी कुछ सेकंड के भीतर आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने तबाही मचा दी। इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढहीं, सड़कों पर मलबा बिखर गया और हजारों परिवार अपनों की तलाश में भटक रहे हैं।
वेनेजुएला में आजादी की लड़ाई की सालगिरह पर पूरे देश में छुट्टी थी। स्कूल, दफ्तर और सरकारी संस्थान बंद थे। ज्यादातर लोग अपने घरों में परिवार के साथ समय बिता रहे थे। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह दिन देश के इतिहास की सबसे भयावह त्रासदियों में बदल जाएगा।

बुधवार शाम अचानक धरती कांपने लगी। पहले 7.2 तीव्रता का झटका महसूस हुआ और लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले करीब एक मिनट के भीतर 7.5 तीव्रता का दूसरा शक्तिशाली भूकंप आ गया। लगातार आए इन झटकों ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। कई बहुमंजिला इमारतें देखते ही देखते ढह गईं और सैकड़ों लोग मलबे में दब गए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि यह संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई इलाकों में बचाव दल अभी तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं।
राजधानी कराकास समेत कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग जान बचाने के लिए घरों से निकलकर सड़कों पर दौड़ पड़े। कई परिवार पूरी रात खुले आसमान के नीचे बैठे रहे क्योंकि आफ्टरशॉक्स का खतरा बना हुआ था। जगह-जगह बिजली के खंभे गिर गए, मोबाइल नेटवर्क ठप पड़ गया और सड़कें मलबे से भर गईं।
सबसे ज्यादा नुकसान तटीय इलाकों और राजधानी के आसपास के क्षेत्रों में हुआ है। कई अस्पतालों में घायलों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्कूलों और सामुदायिक भवनों को अस्थायी राहत शिविरों में बदला जा रहा है, जहां बेघर हुए लोगों को ठहराया जा रहा है।
सरकार ने पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद के प्रस्ताव आने लगे हैं। अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना समेत कई देशों ने राहत और बचाव दल भेजने की पेशकश की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये भूकंप पिछले सौ वर्षों में वेनेजुएला में आए सबसे शक्तिशाली झटकों में शामिल हैं। अभी भी लगातार आफ्टरशॉक्स आ रहे हैं, जिससे बचाव कार्यों में मुश्किलें बढ़ रही हैं। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने की जंग जारी है और हजारों परिवार किसी चमत्कार की उम्मीद में राहत शिविरों और अस्पतालों के बाहर इंतजार कर रहे हैं।











