आदिवासी महिलाओं के सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता के लिए किए गए कार्यों को मिली राष्ट्रीय पहचान
रायपुर। समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली डॉ. बुधरी ताती को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा, जागरूकता और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए गए लंबे और समर्पित कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उन्हें इस सम्मान से अलंकृत किया। यह उपलब्धि न केवल डॉ. बुधरी ताती के सामाजिक योगदान की पहचान है, बल्कि छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र के लिए भी गर्व का विषय है।
बस्तर में महिला जागरूकता और सशक्तीकरण की अलख जगाई
डॉ. बुधरी ताती लंबे समय से बस्तर और आसपास के आदिवासी इलाकों में सामाजिक कार्यों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने वर्ष 1986 में बस्तर जिले के बारसूर क्षेत्र में महिला जागरूकता और सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण पहल की थी।उनके प्रयासों से अनेक महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला। उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया।
शिक्षा और रोजगार से बदली हजारों महिलाओं की जिंदगी
डॉ. ताती के नेतृत्व में संचालित विभिन्न सामाजिक और विकासात्मक कार्यक्रमों का लाभ बड़ी संख्या में महिलाओं को मिला है। उनके प्रयासों से महिलाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए रास्ते खुले, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया।
समाज सेवा के प्रति समर्पण का मिला सम्मान
पद्मश्री सम्मान से सम्मानित होने के बाद प्रदेशभर में खुशी का माहौल है। सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने डॉ. बुधरी ताती को बधाई देते हुए इसे आदिवासी समाज और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया है।
नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा
डॉ. बुधरी ताती का जीवन और कार्य यह संदेश देता है कि समर्पण, सेवा और सकारात्मक सोच के माध्यम से समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।








