17 गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज और बैंक खातों के जरिए सरकारी राशि के गबन की जांच तेज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में अब संगठित गिरोह के सक्रिय होने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, बैंक खातों के माध्यम से सरकारी राशि के लेन-देन और कई विभागों के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के संकेत मिले हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, घोटाले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सर्पदंश से मृत्यु या प्रभावित होने के नाम पर सरकारी मुआवजे की राशि हासिल की गई। इस पूरी प्रक्रिया में विभिन्न बैंक खातों का उपयोग कर रकम का लेन-देन किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

अब तक 17 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में अब तक कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में सिम्स में पदस्थ रहीं डॉ. प्रियंका सोनी के अलावा एसडीएम कार्यालय और तहसीलदार कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर घोटाले के नेटवर्क और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कई पहलुओं पर की जा रही है। फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले, सरकारी राशि के वितरण में शामिल लोगों और विभागीय स्तर पर कथित मिलीभगत की भी गहन पड़ताल की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।







